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केन्द्रीय मंत्री मनसुख भाई मांडविया द्वारा किया श्रम नीति का निर्माण

by admin January 14, 2026
by admin Published: January 14, 2026Updated: January 17, 2026 Share
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भारत में श्रमिक वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। बदलते औद्योगिक परिवेश, तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच श्रमिकों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख भाई मांडविया के नेतृत्व में एक नई और समावेशी श्रम नीति को आकार दिया गया है, जो श्रमिकों, उद्योगों और अर्थव्यवस्था—तीनों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।

इस श्रम नीति का मूल उद्देश्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और श्रम कानूनों को सरल एवं पारदर्शी बनाना है। लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि भारत में श्रम कानून जटिल हैं और उनका प्रभावी क्रियान्वयन कठिन है। मंत्री मांडविया की पहल पर श्रम सुधारों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

नई श्रम नीति में संगठित और असंगठित—दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को केंद्र में रखा गया है। असंगठित क्षेत्र, जिसमें देश की बड़ी आबादी कार्यरत है, अब तक सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहा है। इस नीति के माध्यम से ई-श्रम पोर्टल, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाओं को व्यापक रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है। इससे दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों और घरेलू कामगारों को भी औपचारिक व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।

उद्योगों के दृष्टिकोण से भी यह नीति संतुलित मानी जा रही है। श्रम कानूनों के सरलीकरण से निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। स्पष्ट नियम, समयबद्ध प्रक्रियाएँ और डिजिटल अनुपालन व्यवस्था उद्योगों पर अनावश्यक बोझ कम करती है। मंत्री मांडविया का मानना है कि श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहते हुए उद्योगों को विकास का अवसर देना ही आत्मनिर्भर भारत की नींव है।

इस श्रम नीति में कौशल विकास को भी विशेष महत्व दिया गया है। भविष्य की अर्थव्यवस्था में कुशल मानव संसाधन की भूमिका निर्णायक होगी। इसलिए प्रशिक्षण, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग कार्यक्रमों को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया है, ताकि युवा और श्रमिक वर्ग बदलती तकनीक के साथ कदम मिला सकें।

सामाजिक संवाद और हितधारकों की भागीदारी इस नीति की एक और प्रमुख विशेषता है। श्रमिक संगठनों, नियोक्ताओं और राज्य सरकारों से परामर्श कर नीति को व्यावहारिक बनाया गया है। इससे न केवल विश्वास बढ़ा है, बल्कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की संभावनाएँ भी मजबूत हुई हैं।

कुल मिलाकर, केन्द्रीय मंत्री मनसुख भाई मांडविया द्वारा बनाई गई श्रम नीति भारत के श्रम परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नीति श्रमिकों को सुरक्षा, उद्योगों को स्थिरता और देश को आर्थिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में सार्थक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

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